खायेगा इंडिया तो मरेगा इंडिया
खायेगा इंडिया तो मरेगा इंडिया
मरने से पहले
हॉस्पिटल का बिल भरेगा इंडिया...
ज़्यादातर खाद्य प्रोडक्ट बेंचने वाली कंपनियों के हॉस्पिटल भी हैं, जिनके पास नहीं हैं, वे बनवाने का प्लान कर रही हैं... क्योंकि उन्हें अपने मिलावटी सामानों पर घनघोररूपेण भरोसा है कि भले ही वे "स्वस्थ जीवन, निरोगी काया" टैग लाइन के साथ ही सामान क्यों न बेंचे... रोग तो होना ही है... तो उन रोगों के उपचार का फायदा दूसरा क्यों उठाये ?
वैसे 'गधे की लीद' से घबराने की ज़रुरत नहीं है, "गधा ग्रन्थ" में इसे निकृष्टतम श्रेणी की उच्चतम आयुर्वेदिक औषधियों में से एक माना गया है...
वैसे भी देश में ऐसा माहौल बन चुका है कि कुछ भी खाया जा सकता है...
ऑटोक्रेसी सॉरी डेमोक्रेसी का तो पता नहीं, लेकिन इस समय देश में बकलोली ज़्यादा बढ़ चुकी है...

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